अग्निहोत्र संरक्षण
वैदिक अग्निहोत्र एवं श्रौत यज्ञों की परंपरा को जीवित रखना।
"यज्ञेन वै देवा दिवं गताः" — वेदों में वर्णित यज्ञ परंपरा का संरक्षण हमारा ध्येय।
श्री कात्यायन श्रौत वेद संवर्धन न्यास वैदिक श्रौत परंपरा, अग्निहोत्र एवं वेदाध्ययन के संरक्षण हेतु समर्पित है। गुरु परंपरा और श्रुति आधारित ज्ञान के प्रचार द्वारा हम सनातन संस्कृति का उत्थान चाहते हैं।
वेद पाठशालाओं को संरक्षण, अग्निहोत्र का प्रसार तथा विद्वानों के सहयोग से हम समाज के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास में योगदान देते हैं।
और जानेवैदिक अग्निहोत्र एवं श्रौत यज्ञों की परंपरा को जीवित रखना।
वैदिकाध्ययन एवं वेद पाठशालाओं को संरक्षण एवं समर्थन प्रदान करना।
श्रुति-परंपरा आधारित ज्ञान का प्रचार एवं सांस्कृतिक उत्थान।
संस्थापक, श्रौत यज्ञ संवर्धन न्यास
न्यास के संरक्षक (मार्गदर्शक) तथा पदाधिकारी (कार्यकारिणी) निम्नलिखित हैं।
पूज्य श्रीमद्जगद्गुरु श्रीस्वामीजी राघवाचार्यजी महाराज, माननीय श्रीमद्जगद्गुरु श्रीस्वामीजी वासुदेवाचार्यजी के शिष्य हैं। श्रीस्वामीजी का जन्म विक्रम वर्ष 2033 में फाल्गुन महीने की पंचमी तिथि को एक शर्युपारीण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। फिर उन्होंने श्री विंध्येश्वरीप्रसाद के मार्गदर्शन में वेदों और पूर्वमीमांसा का विशेष ज्ञान प्राप्त किया।