पुराणों के अद्भुत ज्ञाता परमपूज्य स्वामी श्री विष्णु प्रपन्नाचार्य के कनिष्ठ पुत्र के रूप में पं० श्रीराम द्विवेदी जी का जन्म हुआ। आपने बाल्यकाल में ही अपने पूज्य पिता जी से ही व्याकरण व वेद का प्रारम्भिक ज्ञान प्राप्त किया। तथा ८ वर्ष में उपनयन के पश्चात् २५ वर्ष में समावर्तन पर्यन्त वेद-वेदाङ्ग का विभिन्न गुरुजनों से अध्ययन किया।
परमपूज्य ऋषिकल्प श्री६ विन्ध्येश्वरी प्रसाद शुक्ल (श्री ब्रह्मचारी गुरु जी) की कृपा से आपने कल्पसूत्र का अध्ययन कर श्रौत कर्म का ज्ञान प्राप्त किया। विवाह के पश्चात् तुरन्त ही आवसथ्याधान कर कुछ मासों के पश्चात् परमपूज्य श्री ब्रह्मचारी गुरु जी के संरक्षण में परमपूज्य श्री अरविन्द पाण्डेय गुरुजी के साथ व्रात्यस्तोम प्रायश्चित्त कर आपने सोमाधान किया।
इस प्रकार अनेक शताब्दियों के पश्चात् उत्तर भारत के सबसे प्रथम सोमाधान करने वाले बने। तबसे लेकर आपने अग्निष्टोम, अत्यग्निष्टोम, उक्थ्य, षोडशी इस प्रकार चार सोमयागों का अनुष्ठान कर भगवान् यज्ञनारायण व परमपूज्य श्री गुरुजी के श्रीचरणों का अनुग्रह प्राप्त किया है।
सोमयाजी पं० श्रीराम द्विवेदी का परिचय
सोमयाजी पं० श्रीराम द्विवेदी अध्यक्ष, श्रौत यज्ञ संवर्धन न्यास