न्यास सेवा

ट्रस्ट का उद्देश्य —
१. कात्यायनश्रौतसूत्र के अनुसार जिसमें आध्वर्यव हो, लाट्यायन श्रौतसूत्र के अनुसार औद्गात्र तथा शाङ्ख्यायनश्रौतसूत्र से हौत्र जिसमें हो ऐसे यज्ञों के संवर्धन हेतु सम्पूर्ण प्रयास व सहयोग।
२. शुक्लयजुर्वेद (माध्यन्दिन व काण्व) एवं सामवेद की कौथुम शाखा, ऋग्वेद की शाङ्ख्यायन शाखा का विशेष रूप से संवर्धन। अध्ययनार्थ विद्यालय की स्थापना।
३. विशेष आय से रहित आहिताग्नियों को मासिक इष्ट्यर्थ एवं चातुर्मास्य व निरूढ के लिए दान। सोमाधान करने वाले को सहयोग प्रदान करना। वाजपेय, पुण्डरीक, चयन आदि करने वाले आहिताग्नियों को विशेष सहयोग।
४. इष्टि तथा यज्ञ पात्रों के हेतु यज्ञिय वृक्षों का रोपण संवर्धन एवं आधान के समय ऐष्टिक व सौमिक यज्ञपात्र व सामग्री का दान।
५. यज्ञार्थ शुद्ध गव्य पदार्थों को उपलब्ध कराना। गव्य पदार्थों की उपलब्धता हेतु गोशाला, गोपालन, गोसंवर्धन की व्यवस्था।
६. वेद की सभी शाखाओं की एवं षडङ्ग अध्ययन व अध्यापन की व्यवस्था। अध्यापकों के मासिक व आवास की व्यवस्था।
७. श्रौतयज्ञों के सप्रयोग अध्यापन की व्यवस्था।
८. कल्पसूत्र (श्रौत+गृह्य), मीमांसा, ज्योतिष (त्रिस्कन्ध), आयुर्वेद, प्राचीन व्याकरण के अध्यापन की विशेष व्यवस्था।
९. श्रौतयज्ञ के संवर्धन हेतु जो भी कार्य हो उसके लिए सम्पूर्ण प्रयास।
१०. १ वर्ष के अन्तराल से व्रात्यस्तोम का आयोजन।
११. छात्रों के छात्रवृत्ति की व्यवस्था। निर्धन सुयोग्य छात्रों को विशेष छात्रवृत्ति की व्यवस्था।
१२. छात्रों के लिए कम्प्यूटर आदि डिजिटल कोर्स के साथ आधुनिक विषयों के अध्यापन की व्यवस्था।
१३. अप्रकाशित या प्रकाशित होने पर भी दुर्लभता से प्राप्य पुस्तकों का पुनः प्रकाशन।
१४. प्रत्येक वर्ष श्री महाराज जी के नाम (पं० श्रीविन्ध्येश्वरीप्रसादकुबेरनाथशुक्ल श्रौतमणि) से श्रौत यज्ञ में जीवन समर्पित कर देने वाले को पुरस्कार।
१५. श्रौत यज्ञ में विशेष परिश्रम करने वाले छात्रों को पुरस्कार। उनके लिए निःशुल्क पुस्तक, वस्त्र, आवास एवं विशेष छात्रवृत्ति आदि की व्यवस्था।
१६. स्वशाखा कण्ठस्थ करने वाले छात्रों को पुरस्कार। स्वशाखा के पश्चात् अन्यशाखा के अध्ययन हेतु विशेष छात्रवृत्ति।
१७. प्रतिवर्ष परीक्षा प्रतिस्पर्धा का आयोजन, उपाधि वितरण एवं श्रौत पण्डित सम्मेलन।
१८. प्रतिवर्ष कातीय अग्निहोत्री सम्मेलन।
१९. मासिक पत्रिका का प्रकाशन, सभी सदस्यों को पत्रिका व यज्ञ प्रसाद उपलब्ध कराना।
२०. पुस्तकालय की स्थापना।
२१. कन्याओं के संस्कृत अध्यापन की व्यवस्था।
२२. आधुनिक प्रतियोगी परीक्षाओं के अध्यापन की व्यवस्था।
२३. अग्निहोत्री परिवार के आपत्काल स्थिति में तथा उनके पुत्रियों के विवाह में (यदि वैदिक विद्वान् से हो रहा हो), उनके पुत्र के विवाह में (यदि वे वेदज्ञ हों, अग्निहोत्राधान भविष्य में कर सकते हों) यज्ञातिरिक्त सहायता भी समिति स्वविवेकानुसार कर सकती है।
२४. समिति संविधान।
२५. समिति का अध्यक्ष एवं महामन्त्री सर्वदा अग्निहोत्री ही हो सकता है।
२६. समिति के सभी सदस्य बराबर होंगे जिनमें मुख्य कार्यकारिणी सदस्यों की संख्या अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामन्त्री, कोषाध्यक्ष के साथ ३१ होंगे।
२७. मुख्य कार्यकारी सदस्य वही हो सकते हैं जो अग्निहोत्री हों या श्रौतयज्ञ में विशेष ज्ञान रखते हों। चतुर्थ वर्ण का सोमविक्रेता भी सदस्य हो सकता है। अग्निहोत्रियों की पत्नियाँ भी सदस्य हो सकती हैं।
२८. यह समिति कात्यायनसूत्रोक्त विधि से आध्वर्यव वाले यज्ञ के प्रति, वेदविद्या के अध्ययन-अध्यापन के प्रति तथा सभी शाखाओं के अग्निहोत्रियों के हितार्थ के प्रति सदैव समर्पित रहेगी। समिति का यह प्राण उद्देश्य होगा जो अपरिवर्तनीय होगा।
२९. भारतीय परम्परा के अनुसार पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराना।
३०. दैवीय आपदाओं के समय समाज की सेवा करना एवं हर प्रकार से समाज के संरक्षण हेतु समाज के सहयोग से पीड़ित की सेवा करना।
३१. भगवान राम और भगवान कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सामाजिक समरसता के उच्च आदर्शों को स्थापित करने के लिए कार्य करना जिससे धर्मान्तरण और सनातन धर्म के क्षरण को रोका जा सके।
३२. समाज के प्रभावशाली लोगों के मध्य संवाद स्थापित कर भारतीय संस्कृति एवं सांस्कृतिक विकास की कार्य योजना तैयार करना।
३३. निर्धन विद्यार्थियों हेतु शिक्षा की सम्पूर्ण व्यवस्था यथा कलम, कापी, किताब, वस्त्र, शुल्क आदि करना।

न्यास को दान

न्यास के कार्यों में सहयोग हेतु निम्नलिखित राशि में दान कर सकते हैं।

सामान्य दान

₹1,001

न्यास के संवर्धन कार्यों में सहयोग।

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मध्यम दान

₹5,001

वैदिक शिक्षा एवं यज्ञ कार्यों हेतु।

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विशेष दान

₹11,001

श्रौत परंपरा संरक्षण में विशेष योगदान।

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